140 साल पुराना इलाका नाम था अदबी मोहल्ला टाटपट्टी बाखल में रविवार को बिलकुल अलग नजारा था। 1 अप्रैल को डॉक्टरों व स्टॉफ पर हमला कर देश-दुनिया में चर्चा में आए इलाके में लोगों ने सड़क, घरों के ओटले, छत और खिड़की में से तालियां बजाकर डाॅक्टरों का अभिनंदन किया। इसमें वे परिवार भी शामिल हुए, जिनके परिजन रविवार को डिस्चार्ज होकर घर लौटे। इतिहासकार जफर अंसारी बताते हैं 1880 में इंदौर में म्युनिसिपालिटी का गठन हुआ, उस दौर में यहां टाटपट्टी बनती थी। बाद में इसकी पहचान अदबी लोगों के मोहल्ले के रूप में बनी। 1900 के बाद यहां कई शायर, विद्वान, शिक्षक हुए, जिनका समाज में बड़ा नाम व सम्मान था। कपड़ा मिलों की शुरुआत के समय लखनऊ से सैकड़ों बुनकर इंदौर आए, उसमें भी कुछ टाटपट्टी बाखल में आकर बसे।
मध्यप्रदेश / यह इंदौर के अदब की गली है, जिस ‘टाटपट्टी’ ने नाम खराब किया उसने डॉक्टरों के लिए तालियां बजाई